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जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बांसवाड़ा

राधाकृष्णन आयोग 1949, मुदालियर आयोग 1952,कोठारी कमीशन 1964-66 व राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में जिला स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गई। Program of Action-1992 की क्रियान्विति के क्रम में डाइट्स की स्थापना चरणबद्धरूप से सम्पूर्ण देश में की गई।

 

 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाईट हाउस‘ कहा है, जिससे तात्पर्य शिक्षण अधिगम ससाधन, क्रियात्मक अनुसंधान,क्रियाविधि आधारित अधिगम, आवश्यकता आधारित कार्यक्रम, अध्यापको के प्रयोग करने की सुविधा,शिक्षण में शेक्षिक प्रोधोगिकी का समावेश,मूल्यांकन की आधुनिक विधाए तथा अल्पव्ययी शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण के प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षको द्वारा तैयार सामग्रियों का प्रदर्शन,प्रकाशन एवं प्रसार का दायित्व जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया है।

राधाकृष्णन आयोग 1949, मुदालियर आयोग 1952,कोठारी कमीशन 1964-66 व राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में जिला स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गई। Program of Action-1992 की क्रियान्विति के क्रम में डाइट्स की स्थापना चरणबद्धरूप से सम्पूर्ण देश में की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाईट हाउस‘ कहा है, जिससे तात्पर्य शिक्षण अधिगम ससाधन, क्रियात्मक अनुसंधान,क्रियाविधि आधारित अधिगम, आवश्यकता आधारित कार्यक्रम, अध्यापको के प्रयोग करने की सुविधा,शिक्षण में शेक्षिक प्रोधोगिकी का समावेश,मूल्यांकन की आधुनिक विधाए तथा अल्पव्ययी शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण के प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षको द्वारा तैयार सामग्रियों का प्रदर्शन,प्रकाशन एवं प्रसार का दायित्व जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया है।

राधाकृष्णन आयोग 1949, मुदालियर आयोग 1952,कोठारी कमीशन 1964-66 व राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में जिला स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गई। Program of Action-1992 की क्रियान्विति के क्रम में डाइट्स की स्थापना चरणबद्धरूप से सम्पूर्ण देश में की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाईट हाउस‘ कहा है, जिससे तात्पर्य शिक्षण अधिगम ससाधन, क्रियात्मक अनुसंधान,क्रियाविधि आधारित अधिगम, आवश्यकता आधारित कार्यक्रम, अध्यापको के प्रयोग करने की सुविधा,शिक्षण में शेक्षिक प्रोधोगिकी का समावेश,मूल्यांकन की आधुनिक विधाए तथा अल्पव्ययी शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण के प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षको द्वारा तैयार सामग्रियों का प्रदर्शन,प्रकाशन एवं प्रसार का दायित्व जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया है।

राधाकृष्णन आयोग 1949, मुदालियर आयोग 1952,कोठारी कमीशन 1964-66 व राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में जिला स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गई। Program of Action-1992 की क्रियान्विति के क्रम में डाइट्स की स्थापना चरणबद्धरूप से सम्पूर्ण देश में की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाईट हाउस‘ कहा है, जिससे तात्पर्य शिक्षण अधिगम ससाधन, क्रियात्मक अनुसंधान,क्रियाविधि आधारित अधिगम, आवश्यकता आधारित कार्यक्रम, अध्यापको के प्रयोग करने की सुविधा,शिक्षण में शेक्षिक प्रोधोगिकी का समावेश,मूल्यांकन की आधुनिक विधाए तथा अल्पव्ययी शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण के प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षको द्वारा तैयार सामग्रियों का प्रदर्शन,प्रकाशन एवं प्रसार का दायित्व जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया है।

राधाकृष्णन आयोग 1949, मुदालियर आयोग 1952,कोठारी कमीशन 1964-66 व राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में जिला स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जिला स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की संकल्पना की गई। Program of Action-1992 की क्रियान्विति के क्रम में डाइट्स की स्थापना चरणबद्धरूप से सम्पूर्ण देश में की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों को शिक्षा के क्षेत्र में ‘लाईट हाउस‘ कहा है, जिससे तात्पर्य शिक्षण अधिगम ससाधन, क्रियात्मक अनुसंधान,क्रियाविधि आधारित अधिगम, आवश्यकता आधारित कार्यक्रम, अध्यापको के प्रयोग करने की सुविधा,शिक्षण में शेक्षिक प्रोधोगिकी का समावेश,मूल्यांकन की आधुनिक विधाए तथा अल्पव्ययी शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण के प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षको द्वारा तैयार सामग्रियों का प्रदर्शन,प्रकाशन एवं प्रसार का दायित्व जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान को दिया गया है।

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प्रधानाचार्य संदेश

मानव जीवन को विकसित करने के लिए शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा यह देश अपने हजारों साल संस्कृति को संजो कर एवं भविष्य में दुनिया के विकसित देशों के व्यक्तियो के साथ कदम से कदम मिला कर चल सकेगा |

21वी शताब्दी में मानव ,विज्ञान एवं प्रोधोगिकी द्वारा एसी क्रांति लायेंगे जो कल्पना से परे होगा और मानव का दायरा इस संसार तक ही सीमित न रह कर बाह्य जगत से जुडेगे |

हमारा निश्चय है की हम अपने विधार्थीयों को उत्कर्ष शिक्षा केंद्र प्रदान करे , जो उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम एवं स्वालंबी भारतीय नागरिक के रूप में सुसज्जित करे | यह संस्थान ऐसे हों जो उत्तम शेक्षणिक आधारभूत संरचना और सर्वश्रेष्ठ संकाय के द्वारा छात्रों के ज्ञानोपार्जन के साथ अनुशासन व चरित्र निर्माण में सहयोग प्रदान करें एवं अध्यापक्गन , छात्र एवं छात्राये इस शताब्दी के महायग में कदम से कदम मिलाकर बड़े और अपने समय में ही विकसित देश के रूप में देखे |

मेरी शुभकामनाएं

सस्नेह ,

 

प्रधानाचार्य

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संसथान

गढ़ी , बांसवाडा     

डाइट में प्रशिक्षण

 

पूर्व सेवा प्रशिक्षण

  • D.El.Ed 1 वर्ष
  • D.El.Ed 2 वर्ष

 

 

सेवाकालीन प्रशिक्षण

  • वार्षिक कार्यक्रम

 

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