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शिविरा -सितम्बर , 2019      

विद्यालय: शिक्षा और संस्कार के केंद्र 

    कृतज्ञ राष्ट्र अपने महान सपूत शिक्षाविद्, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन् का जन्म दिवस 05 सितम्बर ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाता है।

    राज्य का शिक्षा विभाग शिक्षकों के प्रति अपना सम्मान, राज्यस्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन कर प्रकट करता है। राष्ट्र, राज्य और जिले के साथ-साथ इस वर्ष से ब्लॉक स्तर से ही शिक्षकों का सम्मान पूर्ण पारदर्शी और विकेन्द्रीकृत रूप से कर पाने में राज्य का शिक्षा विभाग गर्व का अनुव कर रहा है। ब्लॉक स्तर पर भी अधिकतम शिक्षकों के सम्मान के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि शिक्षकों द्वारा किए गए कार्यों के पहिचान मिल सके एवं अधिकतम शिक्षक प्रोत्साहित हो | संवेदनशील प्रशासन में ही इस प्रकार की रचनात्मक और सृजन को प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति विकसित होती है।

    सुदूर ढाणी गाँव में भी कठिन परिस्थितियों में रह रहे हमारे शिक्षक, शिक्षा की अलख जगाने का ठोस कार्य करते हैं। उनके परिश्रम का ही सुफल है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित साधनों के  बावजूद भी राजकीय विद्यालयों के बोर्ड और विद्यालयी परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहे हैं। राजकीय विद्कयालयों के नामांकन में उत्साहजनक वृद्धि हुई है। बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओ के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन से समाज के  सभी वर्गों की बालिकाओं  में शिक्षा के प्रति चेतना जाग्रत हुई है। राज्य का शिक्षा विभाग अपने शैक्षिक संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के प्रति दृढ़ संकल्पित है। प्रत्येक राजकीय विद्यालय सही अर्थ में आदर्श और उत्कृष्ट तभी बनेगा जब वहाँ की विद्यालय विकास समिति, संस्थाप्रधान, शिक्षक, अभिभावक और भामाशाह सभी मिलकर न केवल उसक¨ भौतिक संसाधनों से सम्पन्न बनाएं अपितु विद्यालयों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के केंद्र के रूप में भी विकसित करें। शिक्षित और संस्कारित विद्यार्थी ही भविष्य के सुनागरिक बनते हैं।

    मैं समस्त संस्थाप्रधानो  एवं शिक्षकों से उम्मीद करता हूँ कि वे सभी अपने-अपने विद्यालय में शिक्षण हेतु आने वाले समस्त बच्चों  की उनकी क्षमता अनुसार पहिचान कर इसी शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत से ही अतिरिक्त कक्षाएँ लगाकर विशेष मेहनत करेंगे ताकि गुणात्मक शिक्षा सुनिश्चित हो सके एवं विद्यालय का परीक्षा परिणाम भी सुधरे।

समस्त शिक्षको पर बच्चो का भविष्य निर्भर करता है एवं इसी आधार पर हमारे देश की दशा एवं दिशा सुनिश्चित होगी । अतः मुझे पूरी उम्मीद है कि शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को  समझेंगे एवं उसे पूर्ण दृढ़ निश्चय एवं समर्पण से निभायेंगे।

         सभी को  मेरी ओर से हार्दिक बधाई! और शुभकामनाएँ!!


                  सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ।

                                                                                                            नथमल डिडेल

I.A.S.
                                      निदेशक, माध्यमिक शिक्षा 
                                 राजस्थान, बीकानेर

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