निदेशक की कलम से

          

नई ऊर्जा, नये संकल्प

 

                                  शिविरा -फरवरी, 2019

                                                                       परीक्षा: मूल्यांकन का माध्यम

       शिक्षा निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षक अध्यापन के द्वारा और विद्यार्थी अपने अध्ययन से सत्रपर्यन्त कड़ी साधना करते हैं। सत्रान्त में शिक्षक और विद्यार्थी सर्वश्रेष्ठ परिणाम की आषा करते हैं। परीक्षा उनके मूल्यांकन का माध्यम बनती है। हमारा दायित्व है कि विद्यार्थी आनन्ददायी वातावरण में सहजता से परीक्षा दें। विद्यार्थियों पर परीक्षा का तनाव नहीं हो वे भयमुक्त होकर अपने विषय में प्राप्त ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रदर्शित  कर सकें, उच्चतम अंक प्राप्त करें। मुझे जानकारी है कि विद्यालयों में शिक्षकों ने सत्रपर्यन्त विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्यापन करवाया है। परीक्षा की दृष्टि से विषेष कक्षाएँ आयोजित करके न केवल उनकी समस्याओं का हल किया है अपितु उनमें सर्वश्रेष्ठ देने का आत्मविश्वास  भी जाग्रत किया है। परीक्षा कार्यक्रम घोषित हो चुका है, बोर्ड परीक्षाएँ मार्च में हैं। अभी भी जहाँ आवश्यक  है शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए निदानात्मक और उपचारात्मक कक्षाएँ लगाएं और विद्यार्थियों की शत प्रतिषत सफलता सुनिष्चित करें।

       गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए हमारे शिक्षकों ने सत्रपर्यन्त भगीरथी प्रयास किए है वहीं राजकीय विद्यालयों के भौतिक स्वरूप में चार चाँद लगाने में हमारे भामाशाहों का योगदान सराहनीय रहा है। ’डोनेट टू स्कूल’ के तहत भामाशाहों विषेषतः शिक्षकों ने अपने क्षेत्र के विद्यालयों के लिए बढ़-चढ़ कर सहयोग किया है। विभाग अपने शिक्षक भामाशाहों के इस योगदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता है, साथ ही आशा करता है कि समाज के अन्य लोगों में भी शिक्षा के लिए सहयोग देने की भावना बलवती होगी।

       28 फरवरी, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। विज्ञान दिवस एक दिन उत्सव मनाकर इतिश्री कर लेने का अवसर नहीं है यह दिवस हमें प्रेरणा देता है कि हम दृढ़प्रतिज्ञ होकर अपने विद्यार्थियों और समाज के प्रत्येक नागरिक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा जाग्रत करेंगे। 23 जनवरी 2019 को इन्स्पायर अवार्ड मानक [Inspire (Innovation in Science Pursuit For Inspired Research) Manak (Million minds augmenting national aspiration and knowledge)] राज्यस्तरीय प्रदर्शनी  बीकानेर में  बाल वैज्ञानिकों द्वारा बनाये गये मॉडल देखकर लगा कि राजस्थान में भी बच्चों में असीम प्रतिभा है, जरूरत है तराशने की और उन्हें उचित प्लेटफॉर्म प्रदान करने की।

आप सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।                                                                                                              नथमल डिडेल

I.A.S.
                                      निदेशक, माध्यमिक शिक्षा 
                                 राजस्थान, बीकानेर

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राजस्थान की प्रारम्भिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा के समस्त राजकीय, मान्यता प्राप्त गैर सरकारी/CBSE/CISCE से सम्बद्ध विद्यालयों/अनाथ बच्चों हेतु संचालित आवासीय विद्यालयों/विशेष प्रशिक्षण शिविरों एवं शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालयों के लिए सत्र 2018-2019 का यह शिविरा पंचांग प्रस्तुत है। इसके अनुसार ही सत्रपर्यन्त विद्यालयी कार्यक्रम, अवकाश, परीक्षा, खेलकूद प्रतियोगिता आदि का आयोजन अनिवार्य है। 

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