Shri Ashok Gehlot, Hon'ble chief minister of rajasthan

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रणथंभोर राष्ट्रीय पार्क :-

रणथंभौर उत्तरी भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है, जो 392 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करता है। यह दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में, कोटा से लगभग 110 किमी उत्तर पूर्व और जयपुर से 160 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है, जो निकटतम हवाई अड्डा भी है। निकटतम शहर और रेलवे स्टेशन लगभग 11 किमी दूर सवाई माधोपुर में है। पार्क कोटा रेलवे स्टेशन के करीब भी है।  RIDCOR कोटा और रणथंभौर के बीच एक मेगा-हाईवे संचालित करता है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान एक पठार के किनारे पर स्थित है और उत्तर में बनास नदी और दक्षिण में चंबल नदी से घिरा है। इसका नाम ऐतिहासिक रणथंभौर किले के नाम पर रखा गया है, जो पार्क के भीतर स्थित है। रणथंभौर को भारत सरकार द्वारा 1955 में सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था और 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व में से एक घोषित किया गया था। 1980 में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान बन गया। 1984 में, आसन्न जंगलों को सवाई मान सिंह अभयारण्य और केलादेवी अभयारण्य घोषित किया गया था, और 1991 में सवाई मान सिंह और केलादेवी अभयारण्यों को शामिल करने के लिए बाघ अभयारण्य का विस्तार किया गया था। रणथंभौर वन्यजीव अभयारण्य अपने बाघों के लिए जाना जाता है और इन जानवरों को उनके प्राकृतिक जंगल में देखने के लिए भारत में सबसे अच्छी जगहों में से एक है। बाघों को दिन में भी आसानी से देखा जा सकता है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में बाघों को देखने का सबसे अच्छा समय नवंबर और मई में है। पार्क के पर्णपाती वन मध्य भारत में पाए जाने वाले जंगल के विशिष्ट उदाहरण हैं। अन्य प्रमुख जंगली जानवरों में तेंदुआ, नीलगाय, जंगली सूअर, सांभर, लकड़बग्घा, सुस्त भालू, दक्षिणी मैदान ग्रे लंगूर, रीसस मकाक और चीतल शामिल हैं। अभयारण्य विभिन्न प्रकार के पेड़ों, पौधों, पक्षियों और सरीसृपों का घर है, साथ ही भारत में सबसे बड़े बरगद के पेड़ों में से एक है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान लगभग 13 किमी. सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से दूर। 

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काला गौरा भैरव मंदिर

काला गौरा भैरव मंदिर तांत्रिक क्रियाओं के लिए लोकप्रिय, सवाई माधोपुर में कला गौरा भैरव मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है और शहर के केंद्र में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी इस मंदिर में जाता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। मंदिर भैरव भाइयों को समर्पित है; गौरा भैरव और काल भैरव। मुख्य भगवान के देवता के अलावा, देवी दुर्गा, भगवान शिव और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बारे में एक अनोखी बात यह है कि मुख्य देवता अन्य हिंदू मंदिरों के विपरीत प्रवेश द्वार पर स्थापित हैं, जिनके अंदर मुख्य देवता स्थापित हैं। ऐसा कहा जाता है कि राजा हम्मीर ने मंदिर का दौरा किया और अलाउद्दीन-खिलजी के साथ अपने युद्ध में जीत की कामना की। उसने कहा कि यदि वह जीत जाता है तो वह सब कुछ प्रभु को समर्पित कर देगा, और उसने ऐसा किया।

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), सवाई माधोपुर

KHANDAR FORT

KHANDAR FORT

इस क़िले के राजाओं ने कभी हार नहीं देखी। सवाई माधोपुर से 45 कि.मी. दूरी पर ’खंडार किला’ पर्यटकों के लिए एक भव्य स्थल है। मेवाड़ के सिसोदिया राजाओं ने लंबे समय तक इस वैभवशाली और अजेय किले में सुरक्षित रह कर राज किया था। बाद में इसे मुग़लों ने जीत लिया था।

 

                                             

           सवाई माधोपुर जिला अरावली की पहाडियो के नजदीक प्राकृतिक सोन्दर्य से घिरा हुआ प्राचीन इतिहास को संजोये हुये वन्य जीवो की स्वछन्द अठखेलियो के लिये टाईगर सीटी के नाम सें मषहूर है। सवाई माधोपुर जिले में विष्व प्रसिद्ध रणथम्भौर अभ्यारण्य एवं त्रिनैत्र गणेष मन्दिर स्थित है। जिला राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी भाग मे स्थित हैं।  सवाई माधोपुर जिले का क्षेत्र पुराने करौली राज्य तथा पुराने जयपुर राज्य की सवाई माधोपुर,गंगापुर एवं हिण्डौन निजामतो में आता था। 15 मई 1949 को सवाई माधोपुर जिला अस्तित्व में आया। उस समय डाइट की स्थापना करौली में की गई लेकीन 19 जुलाई 1997 को करौली जिला अलग कर दिये जाने के कारण स्थानिय जिले में भी जिला षिक्षा एवं प्रषिक्षण संस्थान की आवष्यकता महसूस की जाने लगी सन 2005 मे जाकर  सवाई माधोपुर जिले को जिला षिक्षा एवं प्रषिक्षण संस्थान मिला इसके लिये ठीगला गाॅव के पास जमीन का आवंटन हुआ और भवन का निर्माण किया गया। परिणाम स्वरूप 2007 मे डाइट का भव्य भवन बनकर तैयार हुआ जिसमे 2009 से डाइट के समस्त क्रिया कलाप संचालित किये जा रहे है। डाईट मे छात्राध्यापको का प्रषिक्षण सत्र 2014-15 से प्रारम्भ हुआ।

प्रारम्भ से अब तक प्रषिक्षण देने का कार्य संस्थान मे किया जा रहा है। संस्थान मे गुणात्मक वृद्धि पर विषेष बल दिया जा रहा है। संस्थान अपनी गतिविधियो को सार्थक एवं उपादेय बनाने मे कृत संकल्प है। डाइट मे विभिन्न प्रभागो के उद्देष्यो को ध्यान मे रखकर विभिन्न कार्य कराये जा रहे है।